डीआईजी सरद सचान ने कहा कि उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर...

डीआईजी सरद सचान ने कहा कि उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नही जाएंगा

सहारनपुर मण्डल में बंद के दौरान मुज़फ्फरनगर में हिंसात्मक झड़प,सहारनपुर व शामली रहें अंडर कंट्रोल

डीआईजी सरद सचान ने कहा कि उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नही जाएंगा

एसएसपी बबलू कुमार ने साबित की एक बार फिर अपनी योग्यता एवं दक्षता

खुफियातंत्र की नाकामी व पुलिस प्रशासन कार्यवाही में देरी के चलते उपद्रवियों के हौसले रहें बुलन्द.!

बाद में आलाधिकारियों के निर्देशन एवं मौजूदगी में उपद्रवियों को घेरकर एवं दौड़ाकर किया गिरफ्तार

तस्लीम बेनक़ाब
मुजफ्फरनगर। एस सी एस टी एक्ट को लेकर काफी हद तक हिंसात्मक रहा उत्तर प्रदेश हालांकि इस मामले में पुलिस को शासन स्तर पर आवश्यक दिशा निर्देश पहले से ही जारी कर दिए गये थे लेकिन इसके बावजूद भी हिंसा होना कहीं ना कहीं पुलिस की सुस्त प्रणाली को दर्शाता है। सहारनपुर रेंज के डीआईजी सरद सचान ने मुज़फ्फरनगर आकर मौके का निरीक्षण किया तथा जहां पर भी ज्यादा हिंसा हुई वहा गए और कहा की कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। मुजफ्फरनगर छेत्र के नई मंडी थाना क्षेत्र के अंतर्गत नई मंडी कोतवाली में सबसे ज्यादा हिंसा का तांडव मचा ओर थाने के बाहर खड़ी गाड़ियों में उपद्रवियों ने आग लगा दी तथा थाने से सटे ATM को भी लूटने का प्रयास किया। काफी देर तक उपद्रवी अपनी मनमानी करते रहे और पुलिस इन्हें काबू में करने में नाकाम रही शहर के क्षेत्रों में भी उपद्रवियों ने बंद के नाम पर काफी हिंसा फैलाई तोड़फोड़ की मार पिटाई की।पुलिस जब तक हरकत में आई तब तक काफी नुकसान हो चुका था सारी जानकारी मिलने के बाद पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया इसी संदर्भ में सहारनपुर रेंज के डीआईजी सरद सचान मुजफ्फरनगर पहुंचे और उपद्रवियों द्वारा तोड़फोड़ का शिकार की गई नई मंडी कोतवाली का निरीक्षण किया तथा यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा की किसी भी कीमत पर उपद्रवियों को बख्शा नहीं जाएगा उनकी पहचान की जा रही है FIR दर्ज होंगी तथा हर हाल में गिरफ्तारियां की जाएंगी पुलिस ने दोपहर बाद गिरफ्तारी का अपना अभियान चलाया तथा उपद्रव करने वाले कुछ युवकों को हिरासत में लिया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी मुजफ्फरनगर में हिंसा के नाम पर जो कुछ हुआ वह बिल्कुल गलत है और सभ्य समाज का बिल्कुल नहीं कहा जा सकता। पुलिस की कहां चूक हुई कैसे हुई यह जांच का विषय है खुफियातंत्र अपनी रिपोर्ट शायद सही ढंग से नहीं दे पाया जिसका परिणाम यह रहा कि इतने बड़े स्तर पर हिंसा हो गई उत्तर प्रदेश के डीजीपी अब समीक्षा कर रहे हैं कहां गलती हुई हैं।
यदि सहारनपुर मंडल के अंतर्गत हम सहारनपुर जनपद की बात करें तो वहां पर कोई भी बड़ी हिंसा या हिंसक झड़प नहीं हुई

कप्तान बबलू कुमार वहां पर बेहतर कार्यप्रणाली का नमूना पेश कर रहे हैं

कुछ समय पूर्व दलित और ठाकुर संघर्ष में उन्होंने दोनों पक्षों को बुलाकर शांति की एक अच्छी पहल की थी तथा दोनों समाज को एक साथ बिठाया और उनकी दूरियों को दूर किया

ऐसी ही सोच का परिणाम है कि सहारनपुर में बंद के दौरान कोई भी ऐसी घटना देखने को नहीं मिली जिसे हिंसात्मक कहा जाए

सहारनपुर मंडल के अंतर्गत
के अंतर्गत शामली जनपद में भी कहीं कोई बड़ी घटना नहीं हुई शांति का माहौल रहा तथा पुलिस ने आंदोलनकारियों पर अपनी पैनी नजर रखी लेकिन मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है और बहुत से सवाल है जिनका जवाब शासन स्तर पर अधिकारियों को देना होगा तो वही गिरफ्तारी के नाम पर पुलिस ने बाद में अपनी खुन्नस निकालते हुए कुछ लोगों को रस्म अदायगी के तौर पर गिरफ्तार किया यह भी बात सोचने की है कि क्या ऐसे युवक जो गिरफ्तार किए गए हैं क्या वह वास्तव में हिंसात्मक घटनाओं में लिप्त थे या केवल पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर खानापूर्ति करके जेल भेजने का खाका तैयार किया है यदि ऐसा है तो यह गलत होगा जो दोषी हो उनको चिन्हित करके उनकी पहचान करके उन्हीं को जेल भेजा जाए जो गिरफ्तार किए गए हैं उनकी इस बात की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए कि वह दोषी है या नहीं घटना में लिप्त है या नहीं और यदि सड़क चलते युवकों को गिरफ्तार किया गया है तो उनको संगीन मामलों में जेल नहीं भेजा जाना चाहिए कार्रवाई की जद में पूर्ण को लाना चाहिए जिन्होंने हिंसा फैलाई और इस को बढ़ावा दिया।
वही दूसरी और इस हिंसा के खेल में कुछ पत्रकारों को भी चोटे आई और मोटरसाइकिलो को भी तोड़ने की कोशिश भी की गई जनपद मुज़फ्फरनगर में डीआईजी सहित सभी बड़े अधिकारी मौजूद हैं समीक्षा चल रही है देखना है कि पुलिस कितनी FIR दर्ज करती है और कितने लोगों की गिरफ्तारी दर्शाती है वही यह भी बात सामने आई है कि अभी तक जनपद में हिंसा के मामले में केवल एक व्यक्ति के मारे जाने की पुष्टि आधिकारिक तौर पर तो नहीं हुई लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि एक व्यक्ति की मौत हुई है
कुछ थानेदारों ने बहुत ही अच्छी कार्यशैली का नमूना पेश करते हुए उपद्रवियों को दौड़ाया तो वहीं कुछ जान बचाकर भागते हुए भी नजर आए
यह कहना गलत नहीं होगा कि बंद को लेकर पुलिस ने कोई ठोस रणनीति तैयार नहीं की थी और जब की तब तक देर हो चुकी थी।

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