बिजली बनाने वाली निजी कंपनियों ने सरकारी मिलीभगत से चम्बा को किया...

बिजली बनाने वाली निजी कंपनियों ने सरकारी मिलीभगत से चम्बा को किया तबाह

वीरेंद्र शर्मा
चम्बा के जल जंगल जमीन से होती है प्रतिदिन करोड़ों की कमाई फिर भी चम्बा पिछड़ा जिला की श्रेणी मे शामिल।
जिला के नेताओं ने नहीं लड़ी  चंबा के हक की लड़ाई। चम्बा की बर्बादी को देखकर अब तक के सभी सांसद भी आंखे मूंद कर बने रहे धृतराष्ट्र

जिला के नेताओं ने नहीं लड़ी  चंबा के हक की लड़ाई। चम्बा की बर्बादी को देखकर अब तक के सभी सांसद भी आंखे मूंद कर बने रहे धृतराष्ट्र

 NHPC आज चम्बा को, बांध के पानी से खतरे में डालकर सालाना अरबों रुपये कमा रही है, तो चम्बा को खतरे से बचाने हेतू इसी कमाई में से धन का प्रावधान करके एक दीर्घकालिक योजना बनाये, जिससे इस समस्या का स्थाई समाधान हो सके । चम्बा को खतरे में डालकर , इनके उच्च अधिकारी अपने आलीशान महलों में दिल्ली में बैठे हैँ। उन्हें चंबा वासियों की कोई चिन्ता नहीं। चम्बा में स्थापित NHPC की बिजली परियोजनाओं से आज हज़ारों मेगावॉट बिजली रोज़ाना तैयार हो रही है, उससे हर रोज करोड़ों की आय हो रही है। संसधानों को दोहन करके ,मात्र अपनी आय बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए।। इसके साथ चम्बा को सुरक्षित करना भी उनका कर्तव्य है। जो भी धनराशि खर्च करेंगे वह यहीं से कमा रहे हैं। हम सभी चम्बा वासियों को सरकार के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस पर भविष्य के लिए स्थाई योजना बनाकर काम करने की अति आवश्यकता है। नुकसान चमेरा बांध के पानी छोड़ने के कटाव से हो रहा है, तो सरकारी या निजी जो भी नुकसान इस पानी से हो रहा है, इसकी भरपाई भी NHPC से ही करवाई जानी चाहिए।  यदि चम्बा में बांध न बनाये जाते, तो इस पैमाने पर आज रावी नदी में बाढ़ न आती, और ना ही चम्बा को इस स्तर पर नुकसान उठाना पड़ता। इसलिए आज भी समय है कि हम समय रहते इस पर गम्भीरता से विचार करें तथा इसके लिए अगर चम्बा वासियों को आंदोलन भी करना पड़े तो, हम सबको इसके लिए अब तैयार होना होगा।
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