आनी आरक्षित : क्या इस बार नये चेहरों में होगा दंगल !

आनी आरक्षित : क्या इस बार नये चेहरों में होगा दंगल !

हकीकत हिमाचल की-07

– दौलत भारती

आनी( आरक्षित) 2012 के बाद आनी और निरमंड अब दो हिस्सों में बंटा हुआ क्षेत्र है. पहले बंजार का तीन कोठी क्षेत्र भी इस में हुआ करता था. ईश्वर दास ने यहाँ से बड़ी लम्बी पारी खेली. 1977 कि आंधी में भी ईश्वर दास अपना किला बचाने में कामयाब रहे. 1982 और 1990 में खूब राम भाजपा के टिकट पर जीते लेकिन पिछले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और जीत दर्ज़ की. 

2007 में यहाँ से बीजेपी को नया चेहरा किशोरी लाल उतारना नफे का सौदा रहा. इस बार आनी की सीट पर टिकट को लेकर खासी गहमागहमी है. बीजेपी कांग्रेस में कई नये चेहरे इस बार टिकट की दौड़ में हैं और अपनी अपनी गोटियाँ फिट करने में जुटे हुए हैं. हालाँकि आनी को मुख्यमंत्री का गढ़ माना जाता है लेकिन जीत तो चेहरा देख कर ही तय होती रही है.

पिछले लम्बे अंतराल से ईश्वर दास को बदलने कि मांग जोर पकड़ रही थी लिहाज़ा पिछली बार बदलाव की बयार में खूब राम फिर विधान सभा पहुँचने में कामयाब रहे. अबकी बार कांग्रेस से आनी के परस राम, दलीप जोशी, दीवान चंद, श्याम लाल तथा दो कर्मचारी नेताओं डीएन कश्यप और सेस राम आजाद का नाम भी लिया जा रहा है. अभी यह फेहरिस्त लम्बी होने की सम्भावना जताई जा रही है.

माहिरों कि माने तो आनी में इस बार नये चेहरों के बीच मुकाबला हो सकता है . ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बीजेपी एक बार फिर किशोरी लाल को आजमाएगी या फिर कोई और होगा. आनी विधान सभा क्षेत्र बीजेपी में भी टिकट के दावे दार कम नहीं हैं. यहाँ से लम्बे अरसे तक प्रधान रहे और पिछली बार हिलोपा टिकट पर चुनाव लड़ कर 8 हज़ार से ज्यादा वोट लेने वाले नंद लाल का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है. यहाँ से मोहन भारती, कांशी राम, सोम चंद आदि भी शामिल हैं. आनी में भी बीजेपी की गुटबंदी कम नहीं है ऐसे में किसका पलड़ा भारी रहता है यह तो वक्त ही बताएगा. 

आनी विधान सभा क्षेत्र वीरभद्र के गृह क्षेत्र के करीबी होने के कारण भले ही वीरभद्र का गढ़ माना जाता है लेकिन यहाँ वामपंथियों के प्रभुत्व को भी नहीं नकारा जा सकता है. 1977 से लेकर कई बार इसका असर दिखाई भी देता है. जानकार कहते हैं कि इस विधान सभा क्षेत्र में वामपंथियों का कैडर पांच हज़ार से भी ज्यादा है. पंचायत और जिला परिषद् के चुनाव में भी इसका असर दिखता रहता है.

माकपा इस सीट से युवा लोकेंदर को मैदान में उतरने कि तयारी में है. माकपा का प्रत्याशी इस सीट से जीते या न जीते लेकिन यहाँ के नतीजों को जरूर प्रभावित करता है. बहरहाल लोग देख रहे हैं कि टिकट किसे मिलता है तभी यहाँ का अगला रुख भी दिखेगा.

 

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