BIHAR की राजनीतिक सुनामी : P.K को फायदा या नुकसान ?

BIHAR की राजनीतिक सुनामी : P.K को फायदा या नुकसान ?

बिहार में आया सियासी भूचाल भले ही अभी थम गया हो लेकिन ये भूचाल कईयों के लिए सियासी सुनामी साबित हुआ। जिनके लिए ये हलचल हिला देने वाली साबित हुई उनमें पहले पायदान पर है लालू यादव का परिवार।

बिहार में नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने से लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के अलावा प्रशांत किशोर को भी ख़ासा नुकसान होता दिख रहा है.

सूत्रों के दावों पर भरोसा किया जाए तो, कहना है कि बीजेपी-जेडीयू की एनडीए सरकार बनते ही प्रशांत किशोर से कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी छिन गया है. साथ ही प्रशांत के लिए नीतीश कुमार के घर के दरवाजे भी फिलहाल बंद हो गए हैं,

दावा यहां तक किया जा रहा है कि जहां वे पटना आने पर ठहरते थे. पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए काम करने के दौरान प्रशांत किशोर ने पटना छोड़ दिया था।

सूत्रों का कहना है कि पंजाब में कांग्रेस के अमरिंदर सिंह को सीएम की कुर्सी तक पहुंचाने के बाद अप्रैल में पटना लौटने पर प्रशांत किशोर केवल सात घंटे यहां रुके थे।

2014 में नीतीश के लिए ये किया था प्रशांत किशोर ने ?

2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने बीजेपी की जीत के लिए रणनीति तैयार की थी। हालांकि सरकार गठन के बाद उनका अमित शाह के साथ अच्छे संबंध नहीं रह गए थे।

इसके बाद साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर से नीतीश कुमार ने संपर्क किया. लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद नीतीश कुमार अपनी खोई हुई राजनीतिक ताकत हासिल करने की जुगत में थे।

है।

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