Friday, August 18, 2017

                          

                            आइये पुरानी धारणाएं बदलें, कुछ नया सोचें!

नमस्कार साथियों!

अगर आप अपनी कृति/समाचारों  को “न्यूज़ इंडिया ट्रस्ट ” तक पहुँचाना चाहें तो यूनिकोड फॉण्ट में ईमेल करें | ईमेल के साथ अपना परिचय संपर्क और फोटोग्राफ ज़रूर भेजें तथा 
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मीडिया में लम्बे समय तक कई वरिष्ठ पदों पर रहे हमारे पत्रकार साथियों ने अपने पत्रकारिता सफ़र के दौरान हर कदम पर पत्रकारों के शोषण की ‘विभत्स’ तस्वीर देख, सोचा कि क्या कभी कुछ ऐसा किया जा सकता है कि पत्रकारों का यह शोषण रूक सके ? पत्रकार  अपनी जान जोखिम में डाल कर समाचारों का संकलन करते हैं और उन्हीं खबरों के खौफ के कारण राजनीतिज्ञ और कार्पोरेट घराने मीडिया समूहों को करोड़ों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ देते हैं किंतु इन मेहनतकश पत्रकारों को अपना नाम मात्र का मानदेय/वेतन तक कभी समय पर नहीं मिल पाता. अधिकांश मीडिया समूह आज अपने संवादाताओं व संपादकों तक को विज्ञापन का लक्ष्य देते हैं तथा उसी में से पंद्रह से बीस फीसदी पत्रकारों को देकर अपने साम्राज्य का निरंतर विस्तार करते रहते हैं.
जिससे पत्रकार न जी सकते हैं न मर, मीडिया समूहों की इन्हीं ज्यादतियों के चलते पत्रकारों के द्वारा आत्महत्या करने की घटनाएं आए दिन सुनाई पड़ती हैं, कई पत्रकार वर्षों से अपने अधिकारों की कानूनी लड़ाई लड़ते कोर्ट, कचहरियों की धूल फांक रहे हैं। दोस्तों यहां हमें यह समझना होगा कि कोई भी मीडिया समूह किसी को कुछ नहीं देता बल्कि यह तमाम मीडिया घराने आपकी मेहनत से ही संचालित होते हैं, आपका ही खून चूस इनका साम्राज्य आपके खून -पसीने की कमाई से ही खड़ा है, यह सब आप भली भांति जानते हैं। पत्रकारों के प्रति इसी दर्द ने हमें इस ‘कांसैप्ट’ के लिए प्रेरित किया। न्यूज़ इंडिया ट्रस्ट की परिकल्पना मीडिया में एक बड़े साकारात्मक बदलाव की छोटी सी पहल है। प्राइम गेन इन्फ्रा  प्राईवेट लि. कम्पनी की स्थापना कर हमने इसके द्वार पत्रकारों व निवेशकों के लिए पूरी तरह खुले रखे हैं। निवेशक 100000 की पूंजी से इस कंपनी में भागीदार बन सकते हैं.
जबकि पत्रकार बिना किसी निवेश के इस संस्थान में शामिल हो सकते हैं, दरअसल यह पत्रकारों का एक ऐसा मंच है जहां पत्रकार अपनी तमाम खबरों के प्रकाशन एवं चयन के लिए स्वतंत्र हैं। इस कंसैप्ट का तीन साल तक छोटे से दायरे में परीक्षण करने के उपरांत हमने इसे मेहनती पत्रकारों के लिए जीवन धारा बदलने वाला पाया है। मामूली सैलरी पर कार्य रहे कुछ पत्रकारों ने इस प्रणाली को अपना कर न सिर्फ अच्छा नाम और शौहरत हासिल की बल्कि आर्थिक तौर पर भी आज वे न सिर्फ स्वतंत्र हैं बल्कि कई और लोगों को रोजगार भी मुहैय्या करवा रहे हैं।
इस कांसैप्ट से जुड़ने के लिए आपको सिर्फ एक कमप्यूटर अच्छी इंटरनेट स्पीड के साथ चाहिए। हमारे द्वारा भेजे गए डिज़ाईन का एक चार गुणा आठ फुट का फ्लैक्स बोर्ड बनवा कर अपने कार्यालय पर लगवा दीजिए। और उसका फोटो हमें भेज दीजिये एक अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर कीजिए कि आप पूरी जिम्मेदारी से सही समाचारों का प्रेषण करेंगे और रोज न्यूनतम पांच समाचार हमें प्रेषित करना शुरू कर दीजिए। (यह जानकारी आगे आपको विस्तार से दी जाएगी) आप अपने इस नए वेंचर के लिए अपने करीबियों से पेड शुभ कामना संदेश लीजिए, अन्य विज्ञापन भी लीजिए और उन्हें साईट पर पोस्ट कर दीजिए। इन विज्ञापनों से अर्जित आय सौ फीसदी आपकी होगी यानि आपको News India Trust को कोई भुगतान नहीं करना हां बिलिंग पर सरकार को देय टैक्स आपको ही चुकाना होगा। क्यूंकि आप अपने पोर्ट के खुद मालिक हैं इसीलिए News India Trust भी आपको किसी प्रकार का कोई भुगतान नहीं करेगा. 
आज के परिवेश में हम चारों ओर नज़र दौड़ाएं तो देश भर के 98 फीसदी मीडिया संस्थान अपने पत्रकारों के बूते अपनी दुकानदारी चला रहे हैं। हमारा मानना है कि विज्ञापनों पर पत्रकारों को कुछ फीसदी नहीं बल्कि 100 फीसदी मिलना ही चाहिए। इन दिनों स्टाफर व नियमित मीडियाकर्मी जहां मजीठिया वेतन आयोग के लिए संघर्षरत हैं वहीं अंशकालिक संवाददाता आज भी शोषण की चक्की में पिस रहे हैं। पत्रकार अपने रसूक के बूते जैसे-तैसे मीडिया समूहों को ढ़ो रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो मीडिया समूह के संचालकों की अय्याशी के आपूर्तिकर्ता बन रह गए हैं तमाम कलमवीर!
> हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के पत्रकारों के हित में आए फैसले के उपरांत तो मीडिया संस्थान पगला से गए हैं। एका-एक अधिकांश पत्रकार अपने-अपने संस्थानों को बोझ बने दिखने लगे हैं, वास्तव में यह पत्रकारिता का भीषण संक्रमण काल है, मीडिया कर्मियों को कोई मंजिल तो दूर रही, दू-दूर तक कोई रास्ता भी नहीं दिखाई दे रहा है. ऐसे में पत्रकारों को एक मंच पर एकत्र कर हम न सिर्फ उनकी लड़ाई, उनके संघर्ष को एक स्वर देने का प्रयास कर रहे हैं बल्कि मीडिया समूह की ज्यादतियों के शिकर हुए मीडिया कर्मियों को एक ऐसा मंच प्रदान कर रहें हैं जो उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के न सिर्फ रास्ते बताएगा बल्कि मीडिया में निराली पहचान भी देगा, हम देश भर में मीडिया का एक ऐसा कारवां तैयार कर रहे हैं जो किसी का गुलाम नहीं होगा बल्कि गुलामी की तमाम जंजीरों को तोड़ कर अपना मालिक खुद होगा.
>>> न्यूज़ इंड़िया ट्रस्ट वह मंच है जो आपकी मेहनत का एक भी कतरा बेकार नहीं जाने देगा।
>>> यहां आप पत्रकार होने के साथ-साथ अपने संस्थान के खुद मालिक होंगे वह भी बिना किसी को एक भी पैसा दिए।
>>> यहां समाचारों के चयन एंव प्रकाशन का पूरा हक व निर्णय प्रशिक्षण पूरा कर लेने के उपरांत आपका होगा. प्रशिक्षण भी हम निःशुल्क देंगे।
>>> तमाम अधिकार आपके हाथ में होने के कारण आप सबसे पहले समाचार अपने पोर्टल पर प्रकाशित करवा कर उसे अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचा सकेंगे। यानि किसी भी प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बहुत तेज़, आप समझ सकते हैं कि आपके समाचार किसी भी प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से अधिक दर्शकों तक अधिक सहज़ता से कम समय में पहुंच सकेंगे। कुछ ही समय में आप अपने इलाके के नं.1 मीडिया समूह के मालिक होंगे।
>>> आप अपने क्षेत्र के बुद्धिजीवी वर्ग, प्रतिष्ठित लोगों व विज्ञापनदाताओं तक हमारी हाईटैक सोशल मीडिया प्लांनिंग के जरिए न सिर्फ अपनी निराली छवि बना सकेंगे बल्कि उनसे म़जबूत सबंधों के चलते अच्छे विज्ञापन भी अर्जित कर सकेंगे जिन पर सौ फीसदी सिर्फ आपका हक होगा।

>>> किसी भी विवाद की स्थिति में आपको नि:शुल्क क़ानूनी मदद हम देंगे.

अब आपको क्या करना है ?

>>> हमारे द्धारा भेजी गई डिजाइनड सामाग्री की स्टेशनरी छापवानी है. जिसमें लैटर हैड व साईन बोर्ड तथा एक स्टैण्डी शामिल है।
>>> न्यूज इंडिया ट्रस्ट का एक चार बाई आठ फुट साईज का बोर्ड अपने कार्यालय में लगाना है।
>>> कार्यालय में कमप्यूटर, प्रिंटर व इंटरनेट की सुविधा सुनिश्चित करनी है, विस्तृत जानकारी कुछ समय उपरांत इसी पृष्ठ पर आगे दी जाएगी, संपर्क बनाए रखें……

 

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